Thursday, 16 June 2016


हमारे प्रकाशन : आपकी राय


(‘वाणी प्रकाशन समाचार की ख़ास पेशकश)


v  वाणी प्रकाशन समाचार’ के जून अंक सेहमारे प्रकाशन: आपकी रायनाम से एक विशेष पृष्ठ का शुभारम्भ किया गया है । चूँकि वाणी प्रकाशन सीधे-सीधे अपने पाठकों से जुड़कर उनसे सम्वाद करना चाहता है और उनकी राय, प्रतिक्रया अथवा आलोचनाओं से रू--रू होना चाहता है इसलिएवाणी प्रकाशन समाचारका एक पूरा पृष्ठ पाठकों के लिए समर्पित किया जा रहा है।

v  यदि आप किसी किसी रूप में वाणी प्रकाशन से जुड़े रहे हैं तो हमें अपने अनुभव या संस्मरण लिखकर जरूर भेंजे । यदि आपने वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कोई पुस्तक पढी है तो अपनी पाठकीय प्रतिक्रियाओं को लिख डालें और हमें भेंजे । यदि आपको कभी वाणी प्रकाशन के कार्यालय में आकर कोई पुस्तक देखने या खरीदने का अवसर मिला हो तो उसके बारे में भी लिखें । आप अपने पाठकीय अनुभव, प्रतिक्रिया, टिप्पणी या संस्मरण लगभग 200-250 शब्दों में लिखकर भेज सकते हैं ।

v  वाणी प्रकाशन समाचारमें हर तरह की पाठकीय प्रतिक्रियाओं का स्वागत किया जाएगा । हालाँकि सम्पादकीय दृष्टि से सामग्री के औचित्य, गुणवत्ता और भाषा को वरीयता दी जाएगी ।हमारे प्रकाशन: आपकी रायके लिए चयनित रचनाओं/प्रतिक्रियाओं/टिप्पणियों को प्रकाशित करने का निर्णय वाणी प्रकाशन के सम्पादकीय विभाग द्वारा लिया जाएगा । जिन पाठकों की रचनाएँ प्रकाशित की जायेंगी उन्हें वाणी प्रकाशन की ओर से एक पुस्तक उपहार स्वरूप भेजी जाएगी ।

जून अंक सेहमारे प्रकाशन: आपकी रायका शुभारम्भ किया गया है वाणी प्रकाशन की एक पुरानी पाठक और कवयित्री बालकीर्ति की एक कविता से जो उन्होंने विशेष रूप से इसी पृष्ठ के लिए लिखा है ।

 वही वाणी... 

शब्दों के मौन को
शब्द से शब्द के अंतराल को
देकर मानी
आत्मा को प्रकाशित करती है वाणी...

                                           कितने ही रंगों के उजास को
कितने ही स्वप्नों के श्लेष, यमक, अनुप्रास को
अपने में समेटती है वाणी...

                                           मकबूल फिदा की तूलिका से
शोभती है आवरण पर वीणापाणी
शारदा के वरदहस्त से खिलती,
कंठ से निःसृत ध्वनियों में
उँगलियों से तारों के तारें टकराती
मद्धम से सुर जगाती, सरगम गाती
वही वाणी...

                                           फूलों की पंखड़ी-से पृष्ठ
पृष्ठों से झाँकती है सोच
खुशबू में खिलती जैसे
मंद वासंती समीर सुहानी
वही वाणी...

                                           सूर्य से किरनें लेकर
ओम से प्रणव लेकर
शब्दों के प्रिज्म बनाती वाणी...
समय फलक पर कहती है
अतीत की अगणित कहानी
और भविष्य के अनुपम रंगों से
इन्द्रधनुष बुनती है ये धानी...

                                           कला की तूलिका में
वीणा के तार की,
कृति की आकृति में
बुद्धि की व्याप्ति की
है यह लम्बी कहानी

                                           अकथ के निर्वात को
शब्दों से भरती,
अक्षरों के मौन को
ध्वनियों से भरती,
जो शब्दों को
अर्थों से है शक्ति देती
वही वाणी...

बालकीर्ति उभरती हुई युवा रचनाकार हैं तथा कविता और कहानियों में समान रूप से सक्रिय है ।
संपर्क : 7623, रघुवरपुरा न. 2, गली न. 15, अमर मोहल्ला, गाँधी नगर, दिल्ली - 110031   

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